मुरली तेरा मुरलीधर 7
जाग न जाने कब वह आकर खटका देगा पट मधुकरसतत सजगता से ही निर्जल होता अहमिति का निर्झरमूढ़ विस्मरण में निद्रा में मिलन यामिनी दे…
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जाग न जाने कब वह आकर खटका देगा पट मधुकरसतत सजगता से ही निर्जल होता अहमिति का निर्झरमूढ़ विस्मरण में निद्रा में मिलन यामिनी दे…
सोच अरे बावरे कर्म से ही तो बना जगत मधुकरचल उसके संग रच एकाकी एक प्रीति पंकिल निर्झरप्राण कदंब छाँव में कोमल भाव सुमन की…
प्राणेश्वर के संग संग ही कुंज कुंज वन वन मधुकरडोल डोल हरि रंग घोल अनमोल बना ले मन निर्झरशेश सभी मूर्तियाँ त्याग सच्चे प्रियतम के…
श्वाँस श्वाँस में रमा वही सब हलन चलन तेरी मधुकरयश अपयश उत्थान पतन सब उस सच्चे रस का निर्झरवही प्रेरणा क्षमता ममता प्रीति पुलक उल्लास…
सो कर नहीं बिता वासर दिन रात जागता रह मधुकर जो सोता वह खो देता है मरुथल में जीवन निर्झर सर्वसमर्पित कर इस क्षण ही…
मंदस्मित करुणा रसवर्षी वह अद्भुत बादल मधुकर मृदु करतल सहला सहला सिर हरता प्राण व्यथा निर्झर मनोहारिणी चितवन से सर्वस्व तुम्हारा हर मनहर टेर रहा…
विरम विषम संसृति सुषमा में मलिन न कर मानस मधुकर,वहां स्रवित संतत रसगर्भी सच्चा श्री शोभा निर्झर !सुन्दरता सरसता स्रोत बस कल्लोलिनी कुलानन्दीटेर रहा वृन्दावनेश्वरी…
नृप बनने के बाद जनों ने पूछा यही हसन से बात पास न सेना विभव बहुत, कैसे सुलतान हुए तुम तात? बोला अरि पर भी…
‘बावरिया बरसाने वाली’ के अभी सैकड़ों छंद यहाँ नहीं आए हैं। इस ब्लॉग की प्रविष्टियों को पढ़कर सम्मानित गजलकार ‘द्विजेन्द्र द्विज जी‘ ने इनमें रूचि…