सच्चा लहरी : तीन
तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण है खुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती है जन्म-जन्म की…
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तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण है खुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती है जन्म-जन्म की…
सच्चा कहता अरे बावरे! द्वारे द्वारे घूम रहा क्यों अपना भिक्षा पात्र पसारे। बहुत चकित हूँ, प्रबल महामाया की माया किससे क्या माँगू, सबको भिक्षुक…
संत बहुत हैं पर सच्चा अद्भुत फकीर है गहन तिमिर में ज्योति किरण की वह लकीर है। राका शशि वह मरु प्रदेश की पयस्विनी है…
पीसत जतवा जिनिगिया सिरइलीं दियवा कै दीयै भर रहलैं रे सजनी।मिरिगा जतन बिन बगिया उजरलैं कागा बसमती ले परइलैं रे सजनी॥ सेमर चुँगनवाँ सुगन अझुरइलैं…
यह ब्लॉग (पंकिल) पिताजी श्री प्रेम नारायण पंकिल की दार्शनिक, आध्यात्मिक एवं प्रेरक स्वान्तःसुखीन रचनाओं को आप तक पहुँचायेगा। आप एक ऐसी प्रतिभा से मिलेंगे…
नृप बनने के बाद जनों ने पूछा यही हसन से बात पास न सेना विभव बहुत, कैसे सुलतान हुए तुम तात? बोला अरि पर भी…