रम्यांतर के पंकिल पृष्ठ पर आपका स्वागत है! यहाँ 'पंकिल' की रचनाओं एवं पुस्तकों का सहज परिचय है! आस्वाद लें!

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सच्चा लहरी : तीन

तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण है खुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती है जन्म-जन्म की…

सच्चा लहरी : दो

सच्चा कहता अरे बावरे! द्वारे द्वारे घूम रहा क्यों अपना भिक्षा पात्र पसारे। बहुत चकित हूँ, प्रबल महामाया की  माया किससे क्या माँगू, सबको भिक्षुक…

सच्चा लहरी : एक

संत बहुत हैं पर सच्चा अद्भुत फकीर है गहन तिमिर में ज्योति किरण की वह लकीर है। राका शशि वह मरु प्रदेश की पयस्विनी है…

जियरा जुड़इहैं रे सजनी -एक प्रिय विमुक्ता का उच्छ्वास

पीसत जतवा जिनिगिया सिरइलीं दियवा कै दीयै भर रहलैं रे सजनी।मिरिगा जतन बिन बगिया उजरलैं कागा बसमती ले परइलैं रे सजनी॥ सेमर चुँगनवाँ सुगन अझुरइलैं…

माझी रे!

n n O Majhi Re: Dipankar Das      nSource: Flickr n nमाझी रे! कौने जतन जैहौं पार।nजीरन नइया अबुध खेवइयाnटूट गए पतवार-nमाझी रे! कौने…

अखिलं मधुरम् : पंकिल की रचनाएं

यह ब्लॉग (पंकिल) पिताजी श्री प्रेम नारायण पंकिल की दार्शनिक, आध्यात्मिक एवं प्रेरक स्वान्तःसुखीन रचनाओं को आप तक पहुँचायेगा। आप एक ऐसी प्रतिभा से मिलेंगे…

मुरली तेरा मुरलीधर 48

n n nपट खटका खटका पीडा देती सन्देश तुम्हे मधुकरnबौरे निशितम मे भी तेरा जाग रहा प्रियतम निर्झरnप्रेममिलन हित बुला रहा है जाने कब से…