सच्चा लहरी : दो

09 March 2013

A poetical and devotional work on sachcha
सच्चा कहता अरे बावरे! द्वारे द्वारे
घूम रहा क्यों अपना भिक्षा पात्र पसारे।
बहुत चकित हूँ, प्रबल महामाया की  माया
किससे क्या माँगू, सबको भिक्षुक ही पाया॥९॥

सब धनवान भिखारी हैं, भिक्षुक नरेश हैं
कहाँ मालकीयत जब तक वासना शेष है।
माँग बनाती हमें भिखारी यही पहेली
नृप को भी देखा फैलाये खड़ा हथेली॥१०॥

सच्चा लहरी : एक

05 March 2013

संत बहुत हैं पर सच्चा अद्भुत फकीर है
गहन तिमिर में ज्योति किरण की वह लकीर है।
राका शशि वह मरु प्रदेश की पयस्विनी है
अति सुहावनी उसके गीतों की अवनी है॥१॥

सच्चा अद्वितीय अद्भुत है, उसको जी लो
बौद्धिक व्याख्या में न फँसो, उसको बस पी लो।
मदिरा उसकी चुस्की ले ले पियो न ऊबो
उस फकीर की मादकता मस्ती में डूबो॥२॥

जियरा जुड़इहैं रे सजनी (एक प्रिय-विमुक्ता का उच्छ्वास)

16 December 2012

Photo source : Google
पीसत जतवा जिनिगिया सिरइलीं
दियवा कै दीयै भर रहलैं रे सजनी।
मिरिगा जतन बिन बगिया उजरलैं
कागा बसमती ले परइलैं रे सजनी॥

सेमर चुँगनवाँ सुगन अझुरइलैं
रुइया अकासे उधिरइलीं रे सजनी।
साजत सेजियै भइल भिनुसहरा
निनियाँ सपन होइ गइलीं रे सजनी॥

माझी रे!

14 December 2012

O Majhi Re
O Majhi Re: Dipankar Das      
Source: Flickr
माझी रे! कौने जतन जैहौं पार।
जीरन नइया अबुध खेवइया
टूट गए पतवार-
माझी रे! कौने जतन जैहौं पार।

माझी रे! ढार न अँसुवन धार।
दरियादिल है ऊपर वाला
साहेब खेवनहार! माझी रे!
रामजी करीहैं बेड़ापार।
माझी रे! कौने जतन जैहौं पार।

आँखों से मन मत बिगड़े...

11 November 2012

अनासक्त सब सहो जगत के झंझट झगड़े
ऐसा यत्न करो आँखों से मन मत बिगड़े।

मौन साध नासाग्र दृष्टि रख नाम सम्हालो 
मन छोटा मत करो काम कल पर मत टालो।

उसे पुकारो उसे रात दिन का हिसाब दो 
महापुरुष को सर्व समर्पण की किताब दो।
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