रम्यांतर के पंकिल पृष्ठ पर आपका स्वागत है! यहाँ 'पंकिल' की रचनाओं एवं पुस्तकों का सहज परिचय है! आस्वाद लें!

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मुरली तेरा मुरलीधर 47

n n nखिल हँसता सरसिज प्रसून तूँ रहा भटकता मन मधुकरnडाली सूनी रही रिक्त तू खोज न सका कमल निर्झरnविज्ञ न था निकटतम धुरी यह…

हे देव तेरा गुणगान मेरे..

n n nदिनचर्या तेरी मेरी सेवा होnकुछ ऐसी कमाई हो जाये।nहे देव तेरा गुणगान मेरेnजीवन की पढ़ाई हो जाये।।nnयह जग छलनामय क्षण भंगुरnखिल कर झड़…

मुरली तेरा मुरलीधर 46

nसहनशील रजकण प्रशान्त बन प्रभुपथ में बिछ जा मधुकरnकिसी भाँति उसके पदतल मे ललक लिपट लटपट निर्झरnप्राणकुंज के सुमन में सुन उसकी मनहर बोलीnटेर रहा…

मुरली तेरा मुरलीधर 45

n n nनिज प्रियतम के विशद विश्व में और न कुछ करना मधुकरnनिरुद्देश्य उसके गीतों को झंकृत कर देना निर्झरnपंकिल भर देना निज कोना बहा…

मुरली तेरा मुरलीधर 44

गाने आया जो अनगाया गीत अभी तक वह मधुकरnवीण खोलते कसते ही सब बासर बीत गये निर्झरnसही समय आया न सज सके उचित शब्दसंभार कभीnटेर…

मुरली तेरा मुरलीधर – 43

भू लुण्ठित हो धूलिस्नात हो जाय न जब तक तन मधुकर।nवह निज कर में ले दुलराये तेरा लघुप्रसून निर्झरnविलख भले सुरभित न किन्तु वह पदसेवा…

मुरली तेरा मुरलीधर 41

n तुम गुरु स्वयं शिष्य मन तेरा प्रथम सुधारो मन मधुकरnजग सुधार कामना मत्त मत जग में करो गमन निर्झर ।nकरता विरत कृष्ण-चिन्तन से जगत…