मुरली तेरा मुरलीधर 47
n n nखिल हँसता सरसिज प्रसून तूँ रहा भटकता मन मधुकरnडाली सूनी रही रिक्त तू खोज न सका कमल निर्झरnविज्ञ न था निकटतम धुरी यह…
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n n nखिल हँसता सरसिज प्रसून तूँ रहा भटकता मन मधुकरnडाली सूनी रही रिक्त तू खोज न सका कमल निर्झरnविज्ञ न था निकटतम धुरी यह…
n n nमौन बैठे हो क्यो मेरे अशरण शरण।nइस अभागे को क्या मिल सकेगा नहीं,nहे कृपामय तेरा कमल-कोमल-चरण।nमौन बैठे हो क्यो मेरे अशरण शरण।n
n n nदिनचर्या तेरी मेरी सेवा होnकुछ ऐसी कमाई हो जाये।nहे देव तेरा गुणगान मेरेnजीवन की पढ़ाई हो जाये।।nnयह जग छलनामय क्षण भंगुरnखिल कर झड़…
nसहनशील रजकण प्रशान्त बन प्रभुपथ में बिछ जा मधुकरnकिसी भाँति उसके पदतल मे ललक लिपट लटपट निर्झरnप्राणकुंज के सुमन में सुन उसकी मनहर बोलीnटेर रहा…
n n nनिज प्रियतम के विशद विश्व में और न कुछ करना मधुकरnनिरुद्देश्य उसके गीतों को झंकृत कर देना निर्झरnपंकिल भर देना निज कोना बहा…
गाने आया जो अनगाया गीत अभी तक वह मधुकरnवीण खोलते कसते ही सब बासर बीत गये निर्झरnसही समय आया न सज सके उचित शब्दसंभार कभीnटेर…
भू लुण्ठित हो धूलिस्नात हो जाय न जब तक तन मधुकर।nवह निज कर में ले दुलराये तेरा लघुप्रसून निर्झरnविलख भले सुरभित न किन्तु वह पदसेवा…
n वह इच्छुक है सुनने को तेरे गीतों का स्वर मधुकरnआ आ मुख निहार जाता है नीर नयन में भर निर्झरnसरस तरंगित उर कर अपना…
n तुम गुरु स्वयं शिष्य मन तेरा प्रथम सुधारो मन मधुकरnजग सुधार कामना मत्त मत जग में करो गमन निर्झर ।nकरता विरत कृष्ण-चिन्तन से जगत…