मुरली तेरा मुरलीधर 33
बिक जा बिन माँगे मन चाहा मोल चुका देता मधुकरnजगत छोड़ देता वह आ जीवन नैया खेता निर्झरnकठिन कुसमय शमित कर तेरा आ खटकाता दरवाजा…
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बिक जा बिन माँगे मन चाहा मोल चुका देता मधुकरnजगत छोड़ देता वह आ जीवन नैया खेता निर्झरnकठिन कुसमय शमित कर तेरा आ खटकाता दरवाजा…
अपने ही लय में तेरा लय मिला मिला गाता मधुकरnअक्षत जागृति कवच पिन्हा कर गुरु अभियान चयन निर्झरnतुमको निज अनन्त वैभव की सर्वस्वामिनी बना बना…
बार बार पथ घेर घेर वह टेर टेर तुमको मधुकरnतेरे रंग महल का कोना कोना कर रसमय निर्झर nसारा संयम शील हटाकर सटा वक्ष से…
ज्यों तारक जल जल करते हैं धरती को शीतल मधुकरnनीर स्वयं जल जल रखता है यथा सुरक्षित पय निर्झरnवैसे ही मिट मिट प्रियतम को सत्व…
मन सागर पर मनमोहन की उतरे मधु राका मधुकर nप्राण अमा का सिहर उठे तम छू श्रीकृष्ण किरण निर्झर nप्रियतम छवि की अमल विभा से…
उसका ही विस्तार विषद ढो रहा अनन्त गगन मधुकरnमन्दाकिनी सलिल में प्रवहित उसकी ही शुचिता निर्झरnउस प्रिय का अरविन्द चरण रस सकल ताप अभिशाप शमनnटेर…
खड़े दर्शनार्थी अपार दरबार सजा उसका मधुकर उपहारों की राशि चरण पर उसके रही बिछल निर्झर मुखरित गृह मुँह जोह रहे सब किन्तु न जाने…
देख शरद वासंती कितने हुए व्यतीत दिवस मधुकर काल श्रृंखलाबद्ध अस्त हो जाता भास्वर रवि निर्झर भग्न पतित कमलों की परिमल सुरभि उड़ा ले गया…
भेंट सच्चिदानन्द ईश को मुक्त प्रभंजन में मधुकर सत निर्मल आकाश पवन चित नित तेजानन्द सतत निर्झर विविध वर्णमयि विश्व वस्तुयें प्रियतम का रंगालेखन टेर…