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मुरली तेरा मुरलीधर 40

n n तिल तिल तरणी गली नहीं दिन केवट के बहुरे मधुकरnवरदानों के भ्रम में ढोया शापों का पाहन निर्झरnसेमर सुमन बीच अटके शुक ने…

मुरली तेरा मुरलीधर 39

तरुण तिमिर देहाभिमान का तुमने रचा घना मधुकरnसुख दुख की छीना झपटी में चैन हुआ सपना निर्झरnधूल जमी युग से मन दर्पण पर हतभागी जाग…

मुरली तेरा मुरलीधर 38

वह विराम जानता न क्षण क्षण झाँक झाँक जाता मधुकरnदुग्ध धवल फूटती अधर से मधुर हास्य राका निर्झरnप्रीति हंसिनी उसकी तेरे मानस से चुगती मोती…

मुरली तेरा मुरलीधर 37

उसके संग संग मिट जाते सभी उदासी स्वर मधुकरnफूल हॅंसी के नभ से भू पर झरते हैं झर झर निर्झरnउसके नयन जलद कर देते प्राण…

मुरली तेरा मुरलीधर 36

कोना कोना प्रियतम का जाना पहचाना है मधुकरnइठलाता अटपटा विविध विधि आ दुलरा जाता निर्झरnशब्द रूप रस स्पर्श गन्ध की मृदुला बाँहों में कस कसnटेर…

मुरली तेरा मुरलीधर 35

चिर विछोह की अंतहीन तिमिरावृत रजनी में मधुकर,nफिरा बहुत बावरे अभीं भी अंतर्मंथन कर निर्झरnसुन रुनझुन जागृति का नूपुर खनकाता वह महापुरुषnटेर रहा है अनहदनादा …

मुरली तेरा मुरलीधर 34

सुन अनजान प्राणतट का मोहाकुल आवाहन मधुकरnरस सागर की तड़प भरी सब चाहें ममतायें निर्झरnस्मरण कराता जन्म जन्म के लिये दिये अनगिन चुम्बनnटेर रहा है…