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Archive: 2008

बावरिया बरसाने वाली

व्रजमंडल नभ में उमड़-घुमड़ घिर आए आषाढ़ी बादल । उग गया पुरंदर धनुष ध्वनित उड़ चले विहंगम दल के दल । उन्मत्त मयूरी उठी थिरक श्यामली निरख नीरद म...

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