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Archive: 2009

मुरली   तेरा    मुरलीधर 38

वह विराम जानता न क्षण क्षण झाँक झाँक जाता मधुकर दुग्ध धवल फूटती अधर से मधुर हास्य राका निर्झर प्रीति हंसिनी उसकी तेरे मानस से चुगती मोती ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 36

कोना कोना प्रियतम का जाना पहचाना है मधुकर इठलाता अटपटा विविध विधि आ दुलरा जाता निर्झर शब्द रूप रस स्पर्श गन्ध की मृदुला बाँहों में कस कस ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 35

चिर विछोह की अंतहीन तिमिरावृत रजनी में मधुकर, फिरा बहुत बावरे अभीं भी अंतर्मंथन कर निर्झर सुन रुनझुन जागृति का नूपुर खनकाता वह महापुरुष ट...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 34

सुन अनजान प्राणतट का मोहाकुल आवाहन मधुकर रस सागर की तड़प भरी सब चाहें ममतायें निर्झर स्मरण कराता जन्म जन्म के लिये दिये अनगिन चुम्बन टेर र...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 32

अपने ही लय में तेरा लय मिला मिला गाता मधुकर अक्षत जागृति कवच पिन्हा कर गुरु अभियान चयन निर्झर तुमको निज अनन्त वैभव की सर्वस्वामिनी बना बना...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 28

उसका ही विस्तार विषद ढो रहा अनन्त गगन मधुकर मन्दाकिनी सलिल में प्रवहित उसकी ही शुचिता निर्झर उस प्रिय का अरविन्द चरण रस सकल ताप अभिशाप शमन...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 17

वह कितनी सौभाग्यवती है अभिरामा वामा मधुकर कुलानन्दिनी कीर्तिसुता की अंश स्वरुपा वह निर्झर उसकी पद नख द्युति से कर ले अपना अंतर तिमिर हरण ...

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मुरली  तेरा  मुरलीधर 16

भर जाते नख शिख पावस घन विकल बरसने को मधुकर जितनी प्यासी भू उतने ही प्यासे हैं नीरद निर्झर तूँ जितना व्याकुल उतना ही व्याकुल है तेरा प्राण...

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विनय की कविता  (ऑडियो)

पाँच-छः वर्ष पहले हमारे कस्बे में हुए एक कवि-सम्मेलन, जो आकाशवाणी वाराणसी के तत्कालीन निदेशक श्री शिवमंगल सिंह ’मानव” की पुस्तक के विमोचन प...

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मुरली  तेरा  मुरलीधर 15

वह अनकहे स्नेह चितवन से उर में धँस जाता मधुकर इस जीवन के महाकाव्य की सबसे सरस पंक्ति निर्झर जन अंतर के रीते घट में भरता पल पल सुधा सलिल टेर ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 14

कोटि काम सुन्दर गुण मन्दिर कोटि कला नायक मधुकर अपने हृदयेश्वर के आगे थिरक थिरक नाचो निर्झर उर वृन्दावन चारी को मन दे उनके मन वाला बन टेर रहा...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 13

बस अपने ही लिये रचा है तुमको प्रियतम ने मधुकर अन्य रचित उसकी चीजों पर क्यों मोहित होता निर्झर श्वांस श्वांस में बसा तुम्हारे रख अपना विश्वास...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 12

नहीं भागते हुए जलद के संग भागता नभ मधुकर चलते तन के संग न चलता कभीं मनस्वी मन निर्झर किससे क्या लेना देना तेरा तो सच्चा से नाता टेर रहा अपनत...

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मुरली तेरा मुरलीधर 11

अगणित जन्मों की ले दारुण कर्मश्रृंखलायें मधुकर जब जो भी दीखता उसी से व्याकुल पूछ रहा निर्झर उसका कौन पता बतलाये नाम रुप गति अकथ कथा टेर रहा ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 10

आह्लादित अंतर वसुंधरा दृग मोती ले ले मधुकर भावतंतु में गूंथ हृदय की मधुर सुमन माला निर्झर पिन्हा ग्रीव में आत्मसमर्पण कर होती कृतार्थ धरणी ट...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 8

संश्लेशित जीवन मधुवन को खंड खंड मत कर मधुकर मधुप दृष्टि ही सृष्टि तुम्हारी वह मरुभूमि वही निर्झर तुम्हें निहार रहा स्नेहिल दृग सर्व सर्वगत न...

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मुरली  तेरा  मुरलीधर 7

जाग न जाने कब वह आकर खटका देगा पट मधुकर सतत सजगता से ही निर्जल होता अहमिति का निर्झर मूढ़ विस्मरण में निद्रा में मिलन यामिनी दे न बिता टेर रह...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 6

सोच अरे बावरे कर्म से ही तो बना जगत मधुकर चल उसके संग रच एकाकी एक प्रीति पंकिल निर्झर प्राण कदंब छाँव में कोमल भाव सुमन की सेज बिछा टेर रहा ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 5

प्राणेश्वर के संग संग ही कुंज कुंज वन वन मधुकर डोल डोल हरि रंग घोल अनमोल बना ले मन निर्झर शेश सभी मूर्तियाँ त्याग सच्चे प्रियतम के पकड़ चरण ट...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 2

मंदस्मित करुणा रसवर्षी वह अद्भुत बादल मधुकर मृदु करतल सहला सहला सिर हरता प्राण व्यथा निर्झर मनोहारिणी चितवन से सर्वस्व तुम्हारा हर मनहर ट...

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सुलतान

नृप बनने के बाद जनों ने पूछा यही हसन से बात      । पास न सेना विभव बहुत, कैसे सुलतान हुए तुम तात    । बोला अरि पर भी उदारता सच्चा स्नेह ...

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