सच्चा लहरी : तीन
तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण है खुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती है जन्म-जन्म की…
रम्यांतर के पंकिल पृष्ठ पर आपका स्वागत है! यहाँ 'पंकिल' की रचनाओं एवं पुस्तकों का सहज परिचय है! आस्वाद लें!
तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण है खुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती है जन्म-जन्म की…
सच्चा कहता अरे बावरे! द्वारे द्वारे घूम रहा क्यों अपना भिक्षा पात्र पसारे। बहुत चकित हूँ, प्रबल महामाया की माया किससे क्या माँगू, सबको भिक्षुक…
संत बहुत हैं पर सच्चा अद्भुत फकीर है गहन तिमिर में ज्योति किरण की वह लकीर है। राका शशि वह मरु प्रदेश की पयस्विनी है…