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भोजपुरी काव्य

जियरा जुड़इहैं रे सजनी -एक प्रिय विमुक्ता का उच्छ्वास

पीसत जतवा जिनिगिया सिरइलीं दियवा कै दीयै भर रहलैं रे सजनी।मिरिगा जतन बिन बगिया उजरलैं कागा बसमती ले परइलैं रे सजनी॥ सेमर चुँगनवाँ सुगन अझुरइलैं…