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Archive: June 2009

मुरली   तेरा    मुरलीधर 8

संश्लेशित जीवन मधुवन को खंड खंड मत कर मधुकर मधुप दृष्टि ही सृष्टि तुम्हारी वह मरुभूमि वही निर्झर तुम्हें निहार रहा स्नेहिल दृग सर्व सर्वगत न...

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मुरली  तेरा  मुरलीधर 7

जाग न जाने कब वह आकर खटका देगा पट मधुकर सतत सजगता से ही निर्जल होता अहमिति का निर्झर मूढ़ विस्मरण में निद्रा में मिलन यामिनी दे न बिता टेर रह...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 6

सोच अरे बावरे कर्म से ही तो बना जगत मधुकर चल उसके संग रच एकाकी एक प्रीति पंकिल निर्झर प्राण कदंब छाँव में कोमल भाव सुमन की सेज बिछा टेर रहा ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 5

प्राणेश्वर के संग संग ही कुंज कुंज वन वन मधुकर डोल डोल हरि रंग घोल अनमोल बना ले मन निर्झर शेश सभी मूर्तियाँ त्याग सच्चे प्रियतम के पकड़ चरण ट...

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