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Archive: December 2008

बावरिया बरसाने वाली 16

सुधि करो अंक ले मुझे कहा था अभीं अभीं चंदा निकला है कैसे कहती ढल गयी निशा लाई है उषा वियोग- बाला है । बोलते कहाँ है अरुणचूड़ किस खग को उड़ते...

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बावरिया बरसाने वाली 15

प्रिय ! इस विस्मित नयना को कब आ बाँहों में कस जाओगे । अपना पीताम्बर उढ़ा प्राण ! मेरे दृग में बस जाओगे । प्रिय! तंडुल-पिंड-तिला वेष्टित...

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