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राधा काव्य

बावरिया बरसाने वाली (काव्य): 1

1. व्रजमंडल नभ में उमड़-घुमड़ घिर आए आषाढ़ी बादल उग गया पुरंदर धनुष ध्वनित उड़ चले विहंगम दल के दल उन्मत्त मयूरी उठी थिरक श्यामली…