11 November 2012

आँखों से मन मत बिगड़े...

अनासक्त सब सहो जगत के झंझट झगड़े
ऐसा यत्न करो आँखों से मन मत बिगड़े।

मौन साध नासाग्र दृष्टि रख नाम सम्हालो 
मन छोटा मत करो काम कल पर मत टालो।

उसे पुकारो उसे रात दिन का हिसाब दो 
महापुरुष को सर्व समर्पण की किताब दो।