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Archive: August 2011

मुरली तेरा मुरलीधर 47

खिल हँसता सरसिज प्रसून तूँ रहा भटकता मन मधुकर डाली सूनी रही रिक्त तू खोज न सका कमल निर्झर विज्ञ न था निकटतम धुरी यह तेरी ही मधुर सुरभ...

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