16 December 2012

जियरा जुड़इहैं रे सजनी (एक प्रिय-विमुक्ता का उच्छ्वास)

Photo source : Google
पीसत जतवा जिनिगिया सिरइलीं
दियवा कै दीयै भर रहलैं रे सजनी।
मिरिगा जतन बिन बगिया उजरलैं
कागा बसमती ले परइलैं रे सजनी॥

सेमर चुँगनवाँ सुगन अझुरइलैं
रुइया अकासे उधिरइलीं रे सजनी।
साजत सेजियै भइल भिनुसहरा
निनियाँ सपन होइ गइलीं रे सजनी॥

14 December 2012

माझी रे!

O Majhi Re
O Majhi Re: Dipankar Das      
Source: Flickr
माझी रे! कौने जतन जैहौं पार।
जीरन नइया अबुध खेवइया
टूट गए पतवार-
माझी रे! कौने जतन जैहौं पार।

माझी रे! ढार न अँसुवन धार।
दरियादिल है ऊपर वाला
साहेब खेवनहार! माझी रे!
रामजी करीहैं बेड़ापार।
माझी रे! कौने जतन जैहौं पार।