19 February 2012

मुरली तेरा मुरलीधर 48

पट खटका खटका पीडा देती सन्देश तुम्हे मधुकर
बौरे निशितम मे भी तेरा जाग रहा प्रियतम निर्झर
प्रेममिलन हित बुला रहा है जाने कब से सुनो भला
टेर रहा सन्देशशिल्पिनी मुरली तेरा मुरलीधर॥२५६॥

अंह तुम्हारा ही तेरा प्रभु वन चल रहा साथ मधुकर
बन्दी हो उससे ही जिसका स्वयं किया सर्जन निर्झर
प्रभु न दीख पडते प्रतिदिन बीतते जा रहे नाच नचा
टेर रहा है अहं अलिप्ता मुरली तेरा मुरलीधर ॥२५७॥