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Archive: 2012

जियरा जुड़इहैं रे सजनी (एक प्रिय-विमुक्ता का उच्छ्वास)

Photo source : Google पीसत जतवा जिनिगिया सिरइलीं दियवा कै दीयै भर रहलैं रे सजनी। मिरिगा जतन बिन बगिया उजरलैं कागा बसमती ले परइलैं ...

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माझी रे!

O Majhi Re: Dipankar Das       Source: Flickr माझी रे! कौने जतन जैहौं पार। जीरन नइया अबुध खेवइया टूट गए पतवार- माझी रे! कौने जतन ज...

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