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Archive: March 2010

मुरली   तेरा    मुरलीधर 46

सहनशील रजकण प्रशान्त बन प्रभुपथ में बिछ जा मधुकर किसी भाँति उसके पदतल मे ललक लिपट लटपट निर्झर प्राणकुंज के सुमन में सुन उसकी मनहर बोली ट...

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