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Archive: January 2010

मुरली तेरा मुरलीधर - 42

वह इच्छुक है सुनने को तेरे गीतों का स्वर मधुकर आ आ मुख निहार जाता है नीर नयन में भर निर्झर सरस तरंगित उर कर अपना बाँट रहा आनन्द विभव टेर...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 41

तुम गुरु स्वयं शिष्य मन तेरा प्रथम सुधारो मन मधुकर जग सुधार कामना मत्त मत जग में करो गमन निर्झर । करता विरत कृष्ण-चिन्तन से जगत राग द्वेष...

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