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Archive: 2010

मुरली   तेरा    मुरलीधर 46

सहनशील रजकण प्रशान्त बन प्रभुपथ में बिछ जा मधुकर किसी भाँति उसके पदतल मे ललक लिपट लटपट निर्झर प्राणकुंज के सुमन में सुन उसकी मनहर बोली ट...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 45

निज प्रियतम के विशद विश्व में और न कुछ करना मधुकर निरुद्देश्य उसके गीतों को झंकृत कर देना निर्झर पंकिल भर देना निज कोना बहा गीतधारा प्र...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 44

गाने आया जो अनगाया गीत अभी तक वह मधुकर वीण खोलते कसते ही सब बासर बीत गये निर्झर सही समय आया न सज सके उचित शब्दसंभार कभी टेर रहा समयानुकूल...

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मुरली तेरा मुरलीधर - 43

भू लुण्ठित हो धूलिस्नात हो जाय न जब तक तन मधुकर। वह निज कर में ले दुलराये तेरा लघुप्रसून निर्झर विलख भले सुरभित न किन्तु वह पदसेवा से करे ...

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मुरली तेरा मुरलीधर - 42

वह इच्छुक है सुनने को तेरे गीतों का स्वर मधुकर आ आ मुख निहार जाता है नीर नयन में भर निर्झर सरस तरंगित उर कर अपना बाँट रहा आनन्द विभव टेर...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 41

तुम गुरु स्वयं शिष्य मन तेरा प्रथम सुधारो मन मधुकर जग सुधार कामना मत्त मत जग में करो गमन निर्झर । करता विरत कृष्ण-चिन्तन से जगत राग द्वेष...

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