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Archive: December 2009

मुरली तेरा मुरलीधर 40

तिल तिल तरणी गली नहीं दिन केवट के बहुरे मधुकर वरदानों के भ्रम में ढोया शापों का पाहन निर्झर सेमर सुमन बीच अटके शुक ने खोयी ऋतु वासंती ट...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 39

तरुण तिमिर देहाभिमान का तुमने रचा घना मधुकर सुख दुख की छीना झपटी में चैन हुआ सपना निर्झर धूल जमी युग से मन दर्पण पर हतभागी जाग मलिन टेर र...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 38

वह विराम जानता न क्षण क्षण झाँक झाँक जाता मधुकर दुग्ध धवल फूटती अधर से मधुर हास्य राका निर्झर प्रीति हंसिनी उसकी तेरे मानस से चुगती मोती ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 37

उसके संग संग मिट जाते सभी उदासी स्वर मधुकर फूल हॅंसी के नभ से भू पर झरते हैं झर झर निर्झर उसके नयन जलद कर देते प्राण दुपहरी को पावस टेर र...

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