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Archive: December 2009

मुरली   तेरा    मुरलीधर 38

वह विराम जानता न क्षण क्षण झाँक झाँक जाता मधुकर दुग्ध धवल फूटती अधर से मधुर हास्य राका निर्झर प्रीति हंसिनी उसकी तेरे मानस से चुगती मोती ...

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