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Archive: October 2009

मुरली   तेरा    मुरलीधर 29

मन सागर पर मनमोहन की उतरे मधु राका मधुकर प्राण अमा का सिहर उठे तम छू श्रीकृष्ण किरण निर्झर प्रियतम छवि की अमल विभा से हो तेरा तन मन बेसुध ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 28

उसका ही विस्तार विषद ढो रहा अनन्त गगन मधुकर मन्दाकिनी सलिल में प्रवहित उसकी ही शुचिता निर्झर उस प्रिय का अरविन्द चरण रस सकल ताप अभिशाप शमन...

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मुरली तेरा मुरलीधर 27

खड़े दर्शनार्थी अपार दरबार सजा उसका मधुकर उपहारों की राशि चरण पर उसके रही बिछल निर्झर मुखरित गृह मुँह जोह रहे सब किन्तु न जाने क्यों आ...

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मुरली तेरा मुरलीधर 26

देख शरद वासंती कितने हुए व्यतीत दिवस मधुकर काल श्रृंखलाबद्ध अस्त हो जाता भास्वर रवि निर्झर भग्न पतित कमलों की परिमल सुरभि उड़ा ले गया ...

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मुरली तेरा मुरलीधर 25

भेंट सच्चिदानन्द ईश को मुक्त प्रभंजन में मधुकर सत निर्मल आकाश पवन चित नित तेजानन्द सतत निर्झर विविध वर्णमयि विश्व वस्तुयें प्रियतम का...

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मुरली तेरा मुरलीधर 24

भूत मात्र में व्याप्त ईश का सूत्र न छोड़ कभीं मधुकर कर्म त्याग संभव न त्याग भी तो है एक कर्म निर्झर रज्जु सर्प ताड़न या उससे सभय पलायन ...

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मुरली तेरा मुरलीधर 23

मुख मन अन्तर श्वाँस श्वाँस सब सच्चामय कर दे मधुकर सच्चा प्रेम सार जग में कुछ और न सार कहीं निर्झर जागृति स्वप्न शयन में तेरे बजे अखण्...

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मुरली तेरा मुरलीधर 22

दुख का मुकुट पहन कर तेरे सम्मुख सुख आता मधुकर सुख का स्वागत करता तो दुख का भी स्वागत कर निर्झर सुख न रहा तो दुख भी तेरे साथ नहीं रहने...

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