08 September 2009

विनय की कविता (ऑडियो)

पाँच-छः वर्ष पहले हमारे कस्बे में हुए एक कवि-सम्मेलन, जो आकाशवाणी वाराणसी के तत्कालीन निदेशक श्री शिवमंगल सिंह ’मानव” की पुस्तक के विमोचन पर आयोजित था व जिसकी अध्यक्षता श्री चन्द्रशेखर मिश्र जी ने की थी, में बाबूजी द्वारा पढ़ी गयी भोजपुरी कविता की बमुश्किल रिकार्डेड ऑडियो फाइल प्रस्तुत है । इसमें बाबूजी ने जगतजननी के चरणों में अपना विनय प्रदर्शित किया है -




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# रमणी के नर्म वाक्यों से खिल उठा मंदार (वृक्ष-दोहद....).... सच्चा शरणम

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर आडिओ है सुन रहे हैं बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें

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  2. सुन्दर गीत हिमांशु भाई
    धन्यवाद आपका

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  3. वाह बहुत बढ़िया लगा! बहुत सुंदर गीत! धन्यवाद!

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  4. बहुत सुन्दर रचना --
    आभार इस प्रस्तुति के लिए
    - लावण्या

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