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Archive: September 2009

मुरली तेरा मुरलीधर 21

स्वाद सुधा में है पदार्थ में स्वाद न पायेगा मधुकर सुख तो सब उसे सच्चे प्रिय में कहाँ खोजता रस निर्झर मन गृह में जम गयी धूल को पोंछ डा...

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मुरली तेरा मुरलीधर 20

इन्द्रिय घट में भक्ति रसायन भर भर चखता रह मधुकर तन्मय चिन्तन सच्चा रस में देता तुम्हें बोर निर्झर कर त्रिकाल उस महाकाल के चरणामृत का ...

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मुरली तेरा मुरलीधर 19

अहं रहित मह मह महकेंगे तेरे प्राण सुमन मधुकर स्निग्ध चाँदनी नहला देगी चूमेगा मारुत निर्झर तुम्हें अंक में ले हृदयेश्वर हलरायेगा मधुर ...

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मुरली तेरा मुरलीधर 18

अपनी ही विरचित कारा में बंधा तड़पता तू मधुकर अपनी ही वासना लहर से पंकिल किया प्राण निर्झर उस प्रिय की कर पीड़ा हरणी चरण कमल की सुखद श...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 17

वह कितनी सौभाग्यवती है अभिरामा वामा मधुकर कुलानन्दिनी कीर्तिसुता की अंश स्वरुपा वह निर्झर उसकी पद नख द्युति से कर ले अपना अंतर तिमिर हरण ...

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मुरली  तेरा  मुरलीधर 16

भर जाते नख शिख पावस घन विकल बरसने को मधुकर जितनी प्यासी भू उतने ही प्यासे हैं नीरद निर्झर तूँ जितना व्याकुल उतना ही व्याकुल है तेरा प्राण...

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विनय की कविता  (ऑडियो)

पाँच-छः वर्ष पहले हमारे कस्बे में हुए एक कवि-सम्मेलन, जो आकाशवाणी वाराणसी के तत्कालीन निदेशक श्री शिवमंगल सिंह ’मानव” की पुस्तक के विमोचन प...

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मुरली  तेरा  मुरलीधर 15

वह अनकहे स्नेह चितवन से उर में धँस जाता मधुकर इस जीवन के महाकाव्य की सबसे सरस पंक्ति निर्झर जन अंतर के रीते घट में भरता पल पल सुधा सलिल टेर ...

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