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Archive: July 2009

मुरली तेरा मुरलीधर 11

अगणित जन्मों की ले दारुण कर्मश्रृंखलायें मधुकर जब जो भी दीखता उसी से व्याकुल पूछ रहा निर्झर उसका कौन पता बतलाये नाम रुप गति अकथ कथा टेर रहा ...

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मुरली   तेरा    मुरलीधर 10

आह्लादित अंतर वसुंधरा दृग मोती ले ले मधुकर भावतंतु में गूंथ हृदय की मधुर सुमन माला निर्झर पिन्हा ग्रीव में आत्मसमर्पण कर होती कृतार्थ धरणी ट...

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