28 February 2009

सुलतान

नृप बनने के बाद जनों ने पूछा यही हसन से बात      ।

पास न सेना विभव बहुत, कैसे सुलतान हुए तुम तात    ।

बोला अरि पर भी उदारता सच्चा स्नेह सुहृद हित प्राप्त   ।

जन-जन प्रति सदभाव न क्या सुलतान हेतु इतना पर्याप्त ।

5 comments:

  1. अति सुंदर.
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. बहुत खूब,
    नित करो जो तुम परहित के काज।
    तो सच मानो सुल्तान हो आज।

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर रचना ...
    आप सबको होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणियां मेरा मार्गदर्शन व उत्साहवर्द्धन करेंगी. सजग टिप्पणियां सजग रचनाधर्मिता के लिये आवश्यक होती हैं.कृपया स्नेह बनाये रखें .