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सुलतान

नृप बनने के बाद जनों ने पूछा यही हसन से बात      ।

पास न सेना विभव बहुत, कैसे सुलतान हुए तुम तात    ।

बोला अरि पर भी उदारता सच्चा स्नेह सुहृद हित प्राप्त   ।

जन-जन प्रति सदभाव न क्या सुलतान हेतु इतना पर्याप्त ।

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5 comments:

  1. अति सुंदर.
    धन्यवाद

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  2. बहुत खूब,
    नित करो जो तुम परहित के काज।
    तो सच मानो सुल्तान हो आज।

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  3. बहुत सुंदर रचना ...
    आप सबको होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...

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