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Archive: October 2008

बावरिया बरसाने वाली 7

सुधि करो प्राण पूछा तुमने "क्यों मौन खड़ी ब्रजबाला हो? स्मित मधुर हास्य की मृदुल रश्मि से करती व्योम उजाला हो । तुम वारी-वीचि की सरस...

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बावरिया बरसाने वाली6

था कहा "धूसरित ग्रीष्म गगन या सरस बरसता पावस हो। चांदनी चैत की हो डहकी या हेमंतिनी अमावस हो । प्रति दिवस जलज जयमाल लिए मैं सुमुखि करूंग...

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बावरिया बरसाने वाली2

थे नाप रहे नभ ओर-छोर चढ़ धारधार पर धाराधर । दामिनी दमक जाती क्षण-क्षण श्यामलीघटाओं से सत्वर । कल-कल छल-छल जलरव मुखरित था यमुना-पुलिन मनो...

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बावरिया बरसाने वाली

व्रजमंडल नभ में उमड़-घुमड़ घिर आए आषाढ़ी बादल । उग गया पुरंदर धनुष ध्वनित उड़ चले विहंगम दल के दल । उन्मत्त मयूरी उठी थिरक श्यामली निरख नीरद म...

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